Headline
मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ*  *प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा*
मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ* *प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा*
*हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री*  *मुख्यमंत्री की घोषणा-हर वर्ष प्रदान किया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’*
*हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री* *मुख्यमंत्री की घोषणा-हर वर्ष प्रदान किया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’*
उत्तराखंड में आज से शुरू होने जा रही मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना*  *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज करेंगे मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना का शुभारंभ*
उत्तराखंड में आज से शुरू होने जा रही मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना* *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज करेंगे मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना का शुभारंभ*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देखी आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’, नीम करौली बाबा की भक्ति और सेवा भावना से हुए अभिभूत*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देखी आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’, नीम करौली बाबा की भक्ति और सेवा भावना से हुए अभिभूत*
स्वास्थ्य मंत्री ने फार्मेसी अधिकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को दिये आवश्यक कार्यवाही के निर्देश*
पशुपालन तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के 101 नवनियुक्त कार्मिकों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किए नियुक्ति पत्र*
पशुपालन तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के 101 नवनियुक्त कार्मिकों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किए नियुक्ति पत्र*
*26 मदरसों को मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र*  “ *आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल”*
*26 मदरसों को मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र* “ *आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल”*
अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया ने सीएम धामी को भावुक पत्र के साथ भेजी राखी*
अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया ने सीएम धामी को भावुक पत्र के साथ भेजी राखी*
मुख्यमंत्री ने चम्पावत में किया ‘खेल महाकुम्भ-मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी-2026’ का शुभारम्भ*
मुख्यमंत्री ने चम्पावत में किया ‘खेल महाकुम्भ-मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी-2026’ का शुभारम्भ*

संविधान के मजाक पश्चिम बंगाल से शुरू

संविधान के मजाक पश्चिम बंगाल से शुरू

ओमप्रकाश मेहता
भारतीय प्रजातंत्र में इससे बड़ा मजाक क्या होगा कि अब राज्य सरकारें संसद के अधिकारों पर अतिक्रमण कर संविधान में संशोधन अपनी विधानसभा के माध्यम से कराये? किंतु अब हमारे संविधान के साथयह मजाक शुरू हो गया है, जिसकी शुरूआत पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने कर दी है, इस राज्य की सरकार ने भारतीय दण्ड संहिता में संशोधन का अधिकार संसद की उपेक्षा कर अपने हाथों में ले लिया तथा दुष्कर्मियों को फांसी देने वाला संविधान संशोधन (दण्ड संहिता संशोधन) वाला प्रस्ताव अपनी विधानसभा से पारित करवा लिया और अब इसे राष्ट्रऊपति की मंजूरी के लिए भेजने का फैसला लेकर पुन: एक बार संसद के अधिकार पर अतिक्रमण की जुर्रत करने की तैयारी की जा रही है, यह भी कहा जा रहा है कि यह कानूनी संशोधन देश के सभी राज्यों पर लागू होगा, आखिर पश्चिम बंगाल सरकार यह सब हमारे संविधान की कौन सी धारा के तहत् करने जा रही है?

यह माना कि कलकत्ता में एक महिला चिकित्सक के साथ घटी घटना राष्ट्रीय शर्म का विषय है और उस पर राष्ट्रव्यापी आक्रोश व्यक्त करना भी सही है, लेकिन इसका मतलब यह तो नही कि पश्चिम बंगाल की सरकार अपनी विधानसभा में संवैधानिक दण्ड प्रक्रिया संहिता में संशोधन का प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी को भेज दे? संवैधानिक प्रक्रिया के तहत् उसे अपनी विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर संसद तथा केन्द्र सरकार को पारित करवाने के लिए भेजना चाहिए था और उसे संसद से पारित होने तक प्रतीक्षा करनी चाहिए थी, उसके बाद संसद ही दण्ड प्रक्रिया कानून में संशोधन कराने की वैधानिक अधिकारी थी, किंतु यदि हमारी राज्य सरकारें इस तरह संसद व केन्द्र के अधिकार अपने हाथ में लेकर ऐसे प्रस्ताव पारित करेगी तो फिर हमारे संविधान का क्या महत्व रह जाएगा? और फिर हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं का क्या हश्र होगा?

यह एक गंभीर विचार विमर्श का विषय है, जिस पर न सिर्फ केन्द्र व राज्य सरकारों बल्कि हमारे संविधान के जानकार विद्वानों को भी गंभीर विचार करना चाहिए, हमारे संविधान व कानून को राजनीतिक हथियार बनाना और उनके माध्यम से राजनीतिक लड़ाई लडऩा कहां तक उचित है? क्या अब हमारे माननीय राजनेता और उनके राजनीतिक दल अपनी संवैधानिक मर्यादा भी भूल गए? जो उन्होंने संसद, विधानसभा और संविधान व कानून को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बना लिया? हमारे राजनेताओं व उनके दलों की इस ‘करनी’ को कौन सी श्रेणी में रखा जाए? क्या हमारे व्यक्तित्व, राजनीति और उसके साथ हमारी सोच का स्तर इतना गिर गया? यह एक गंभीर चिंतनीय विषय है, जिस पर सभी को मिल-बैठ कर गंभीर विचार-विमर्श व चिंतन करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top