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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम*
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श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ के कपाट विधि-विधान के साथ खुले*
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सीएम धामी का विपक्ष पर तीखा प्रहार — “महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने वालों को मातृशक्ति देगी करारा जवाब”*
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परमार्थ निकेतन में भागवत भास्कर, गोपालक संत श्री सदानन्द जी के श्रीमुख से गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा रूपी ज्ञान गंगा प्रवाहित

परमार्थ निकेतन में भागवत भास्कर, गोपालक संत श्री सदानन्द जी के श्रीमुख से गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा रूपी ज्ञान गंगा प्रवाहित

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा रूपी ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है। श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने हरि कथा हरित कथा का संदेश दिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्रीमद् भावगत में प्रभु की लीलाओं का अद्भुत आनन्ददायक वर्णन किया गया है जिसे सुनकर  चित्त उन दिव्य लीलाओं में मग्न होकर शांत हो जाता है।

श्रीमद् भागवत कथा में सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक मूल्यों के साथ प्राकृतिक वातावरण का अद्भुत समावेश किया गया है,यह कथा जीवन की व्यथा को हर लेती है, और मानव जीवन के उत्थान का संदेश देती है।

भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में प्रकृति के मनोरम दृश्यों और प्रसंगों का वर्णन प्रकृति के प्रति हमारी चेतना जागृत करने के लिये किया है और बताया है कि पृथ्वी की परिपूर्णता प्रकृति से है और इसी परिपूर्णता का अद्भुत वर्णन श्रीमद् भागवत कथा में किया गया है।

हम कहते हैं जल ही जीवन है इसकी यथार्थता का प्रसंग श्रीमद्भागवत पुराण में मिलता है जिसमें हमारी नदियों को उस विराट ब्रह्म की नाड़ियाँ कहा गया है। नदियां स्वच्छता व पवित्रता का सर्वोत्तम साधन है जो शरीर व अंत:करण दोनों को निर्मल करती है तथा प्रकृति से हमें उन सभी अभीष्ट वस्तुओं की प्राप्ति होती है जिसके बिना हमारे जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती अर्थात् प्रकृति की अनुकूलता ही हमारी उन्नति का आधार है और प्रकृति की प्रतिकूलता हमारे विनाश का कारण भी हो सकती है, जिसे हम सभी देख रहे हैं इसलिये जरूरी है हमारी कथायें, हमारे आयोजन, पर्व और त्यौहार हरित हो और पर्यावरण संरक्षण के लिये समर्पित हो।

कथा व्यास श्री सदानन्द जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन को आनन्दित कर देती है। जीवन के वियोग व विषाद को आनन्द में बदल देती है परन्तु कथा अगर परमार्थ निकेतन के दिव्य, सात्विक, सौम्य, शान्त गंगा के तट पर हो तो वह अपने आराध्य शरणागत वत्सल की शरण में स्थान प्रदान कराती है। जीवन की अशान्ति, कोलाहल, शोर और प्रदूषण से दूर परम आनन्द की प्राप्ति कराती है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनेक प्रसंगों में प्रकृति की महिमा का अद्भुत वर्णन किया गया है और बताया गया है कि प्रकृति का संतुलन मानव समाज के लिये हितकर है और असंतुलन समाज के लिये घातक है। श्रीमद् भागवत पुराण हमें प्रकृति के प्रति मर्यादित जीवन जीने का संदेश देती है। आईये परमार्थ निकेतन के इस दिव्य तट से प्रकृति की सेवा करने का संकल्प लें।स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कथा व्यास श्री सदानन्द जी को माँ गंगा के आशीर्वाद स्वरूप रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट किया। दोनों दिव्य विभूतियों ने एक-दूसरों को अंगवस्त्र भेंट कर  संत परम्परा का अभिनन्दन किया। इन दिव्य पलों का आनन्द कथा आयोजक जैन परिवार और भारत के विभिन्न राज्यों से आये भक्तों ने लिया।

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