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मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में पत्रकारों के कल्याण एवं सम्मान के लिए महत्वपूर्ण निर्णय* *पत्रकार कल्याण कोष से चार दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को ₹5-₹5 लाख की आर्थिक सहायता की संस्तुति*
मुख्यमंत्री ने नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन को दिखाई हरी झंडी*  *नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार और पुलिस की नहीं, पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री*
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मुख्यमंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकभाषाओं के वॉइस कलेक्शन पोर्टल का किया शुभारंभ*
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डीएम डॉ0 आशीष चौहान ने अधिकारियों, नगर निगम कर्मियों एवं विद्यालय की छात्राओं के साथ स्वयं उठाया कूड़ा, स्वच्छता का दिया संदेश*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने द टॉसब्रिज स्कूल के संस्कार दिवस समारोह में विद्यार्थियों को संस्कारों, अनुशासन और जीवन मूल्यों का महत्व समझाया।*
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो अग्निवीरों के 40वीं वाहिनी पीएसी में समायोजन को दी मंजूरी* *सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को मिलेगा सेवा का अवसर, उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष होगा समायोजन*
मेधावी विद्यार्थी उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य के आधार स्तंभ : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*
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*मुख्यमंत्री धामी की घोषणा, ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मिलेगी अतिरिक्त राहत*

परमार्थ निकेतन में संतों, छात्रों और निराश्रितों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन

परमार्थ निकेतन में संतों, छात्रों और निराश्रितों के लिए विशेष भंडारे का आयोजन

समाज में समरसता, समानता और मानवता की भावना को विकसित करना*

भंडारा न केवल भौतिक पोषण का माध्यम है, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक उन्नति का भी साधन

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें ऋषिकुमारों, संतों और निराश्रितों के साथ ही सभी उपस्थित लोगों ने प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि वायु और जल के बाद भोजन तीसरी सबसे बुनियादी मानवीय ज़रूरत है। सभी को पर्याप्त भोजन का अधिकार होना चाहिए। भोजन, जीवन और स्वतंत्रता, काम और शिक्षा के अधिकार मानवाधिकारों की श्रेणी में आते हैं जिसका संरक्षण जरूरी है।

स्वामी जी ने बताया कि भंडारा न केवल भौतिक पोषण का माध्यम है, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक उन्नति का भी एक साधन है। भोजन कराने से समाज में सेवा और समर्पण की भावना विकसित होती है।

स्वामी जी ने कहा कि भोजन, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकारों के संरक्षण से समाज में समानता और समरसता को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने हेतु प्रेरित करते हुये कहा कि जब हम समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की सेवा करते हैं, तो हम न केवल उन्हें सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि अपने जीवन को भी सार्थक बनाते हैं।

भंडारों के माध्यम से समाज में सेवा, समर्पण और समरसता की भावना को बढ़ावा मिलता है। निराश्रितों को भोजन कराना न केवल एक धार्मिक और सामाजिक कार्य है, बल्कि यह एक मानवीय कर्तव्य भी था। जिससे न केवल किसी दिन बदलता है बल्कि भोजन कराने वालों का दिल भी बदलता है।

स्वामी जी ने सभी का आह्वान करते हुये कहा कि अब समय आ गया कि हम सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भंडारों का आयोजन करे। भंडारों में प्लास्टिक और थर्माकोल के पत्तल, दोने और गिलासों का उपयोग न करे क्योंकि यह पर्यावरण के लिये अत्यंत घातक है।

16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस है। पोषण, सामर्थ्य, पहुंच और सुरक्षा’ सभी का अधिकार है। दुनिया में 2.8 बिलियन से ज्यादा लोग स्वस्थ आहार का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।

अस्वास्थ्यकर आहार से सभी प्रकार के कुपोषण – अल्पपोषण का शिकार हो सकते हैं। वैसे भी वर्तमान समय में मिट्टी, पानी और हवा प्रदूषित हो रही हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हो रहा है जिससे जैव विविधता के भी नुकसान हो रहा हैं और शरीर पर इसका विपरित असर हो रहा है।

स्वामी जी ने कहा कि बेहतर उत्पादन, बेहतर पोषण, बेहतर पर्यावरण और सभी के लिए बेहतर जीवन अत्यंत आवश्यक है। बेहतर जीवन और बेहतर भविष्य के लिए खाद्य पदार्थों तक सभी की पहुंच भी जरूरी है। वायु और जल के बाद भोजन तीसरी सबसे बुनियादी मानवीय ज़रूरत है इसलिये सभी को पर्याप्त भोजन का अधिकार होना चाहिए।

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