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मुख्यमंत्री ने नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन को दिखाई हरी झंडी*  *नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार और पुलिस की नहीं, पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री*
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मुख्यमंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकभाषाओं के वॉइस कलेक्शन पोर्टल का किया शुभारंभ*
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डीएम डॉ0 आशीष चौहान ने अधिकारियों, नगर निगम कर्मियों एवं विद्यालय की छात्राओं के साथ स्वयं उठाया कूड़ा, स्वच्छता का दिया संदेश*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने द टॉसब्रिज स्कूल के संस्कार दिवस समारोह में विद्यार्थियों को संस्कारों, अनुशासन और जीवन मूल्यों का महत्व समझाया।*
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो अग्निवीरों के 40वीं वाहिनी पीएसी में समायोजन को दी मंजूरी* *सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को मिलेगा सेवा का अवसर, उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष होगा समायोजन*
मेधावी विद्यार्थी उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य के आधार स्तंभ : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*
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*मुख्यमंत्री धामी की घोषणा, ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मिलेगी अतिरिक्त राहत*

मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने दिवालीखाल में रोका

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मूल निवास, स्थायी राजधानी और भू-कानून की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन

गैरसैंण। मूल निवास, भू-कानून और स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने दिवालीखाल में रोक दिया। इसके बाद संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी और कुमाऊं संयोजक राकेश बिष्ट सहित अन्य आंदोलनकारी दिवालीखाल में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने जमकर नारेबाजी की और सरकार को चेतावनी दी कि इस सत्र में इन मुद्दों के प्रस्ताव पारित न होने पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि हमारी मुख्य मांग है कि सरकार विधानसभा सत्र में मूल निवास 1950, भू-कानून और स्थायी राजधानी गैरसैण का प्रस्ताव पारित करे। सरकार पहाड़ के अस्तित्व से जुड़े इन मुद्दों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है। आज पहाड़ की पहचान और अस्मिता खतरे में है। नौकरियों से लेकर हमारी जमीनें बाहर के लोग कब्जा जमा रहे हैं। ठेकेदार भी बाहर से आकर यहाँ काम कर रहे हैं। लगातार बाहर से आने वाले लोगों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे यहां के पहाड़ी अल्पसंख्यक होने के कगार पर पहुँच गए हैं। मूल निवास और मजबूत भू-कानून पहाड़ को बचाने के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन मुद्दों पर कानून नहीं बनाए तो उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन शुरू होगा। आज हमारा शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिलने जा रहा था। लेकिन हमें पुलिस द्वारा रोक दिया गया। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अब जनता की आवाज़ सुनने वाली सरकार नहीं रही।

संघर्ष समिति के कुमाऊं संयोजक राकेश बिष्ट और स्थायी राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि स्थायी राजधानी के लिए हमारा संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी पहाड़ की आत्मा गैरसैंण में ही होनी चाहिए। राज्य निर्माण की अवधारणा तभी साकार होगी, जब राजधानी गैरसैण बनेगी। दो-तीन दिन के सैर-सपाटे से पहाड़ का भला नहीं हो सकता। इस मौके पर सह संयोजक भुवन कठैत, रवि नेगी, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष हितेश बिष्ट, श्रीपाल राम सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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