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₹1.11 लाख करोड़ का संतुलित बजट, विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*
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आठ मूल मंत्रों से सरकार ने साधा संतुलन*  *राज्य सरकार के बजट में संतुलन के एक-एक अक्षर के गहरे अर्थ*  *सीएम ने विकास व प्रगति की सोच को अनूठे अंदाज में सामने रखा*
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समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य: सीएम*
उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, कहा— “पहाड़ की असली ताकत उसकी मातृशक्ति”*
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नूतन न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का शुभारंभ* गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को बैरागी कैम्प में उत्तराखंड सरकार द्वारा नूनत न्याय संहिता” विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया
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ऐसा मंदिर जो केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है – प्रशांत मैठाणी की कलम से

ऐसा मंदिर जो केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है – प्रशांत मैठाणी की कलम से

देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जनपद के उर्गम घाटी में 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर उच्च हिमालई क्षेत्र में स्थित यह वंशीनारायण मंदिर है। यह मंदिर पंच केदारों में से एक कल्पेश्वर केदार से कुछ दूरी पर ग्राम कलगोठ के पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर पांडव कालीन माना जाता है। मंदिर कत्यूर शैली में निर्मित है। भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर में मनुष्य को पूजा करने का अधिकार सिर्फ एक दिन के लिए ही है। माना जाता है कि इस मंदिर में नारद 364 दिन भगवान नारायण की पूजा करते हैं और केवल एक दिन ही मनुष्य यहां पूजा कर सकता है।

यह मंदिर आम जनों हेतु पूरे साल में केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है। पौराणिक मान्यता है कि जब राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने द्वारपाल बनने का आग्रह किया तो नारायण ने स्वीकार कर उनके साथ पाताललोक चले गए, तब माता लक्ष्मी नारायण की खोजबीन करते हुए नारद ऋषि के पास पहुंची, नारद जी ने उन्हे बताया कि भगवान विष्णु पाताललोक में राजा बलि के यहां है, यदि माता आप श्रावण माह की पूर्णिमा को पाताल लोक जाकर राजा बलि को राखी बांधे, इसके बदले नारायण को वापस मांग सकते हो, माता ने यही किया और भगवान विष्णु पाताल लोक से मुक्त हुए।

मान्यता है कि मां लक्ष्मी के साथ नारद ऋषि भी पाताल लोक गए, उनकी अनुपस्थिति में उस दिन पूजा गांव के ही एक पुजारी द्वारा की गई। माना यह भी जाता है की इस मंदिर से पाताल लोक के लिए रास्ता है इसी मार्ग से भगवान विष्णु आए और यहां वंशी नारायण मंदिर में भगवान विष्णु ने दर्शन दिए थे। तब से ही यह प्रथा चली की रक्षा बंधन के दिन यहां विष्णु भगवान की बड़ी ही धूमधाम से पूजा कर उन्हें राखी बांधते हैं।

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

लेखन ✍️©️ प्रशांत मैठाणी copy right

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