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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने प्रस्तुत किया उत्तराखंड के विकास का रोडमैप*
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मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनके सफल नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर दी शुभकामनाएं।*
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मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए प्रदान की ₹ 89 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सच हो रहा विकसित भारत का संकल्प – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
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*न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं सुदृढ़ बनाने में “जूडिशियम 2.0” महत्वपूर्ण पहल : मुख्यमंत्री*
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ब्रिक्स मंच पर चमका उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल, सिल्क्यारा रेस्क्यू की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक*
6 करोड़ रुपए से जनपद अल्मोड़ा में कराई जाएगी तारबाड़। खेती होगी सुरक्षित : मुख्यमंत्री*
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पूज्य माता जी के नाम से पौधा रोपित किया*
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ऐसा मंदिर जो केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है – प्रशांत मैठाणी की कलम से

ऐसा मंदिर जो केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है – प्रशांत मैठाणी की कलम से

देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जनपद के उर्गम घाटी में 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर उच्च हिमालई क्षेत्र में स्थित यह वंशीनारायण मंदिर है। यह मंदिर पंच केदारों में से एक कल्पेश्वर केदार से कुछ दूरी पर ग्राम कलगोठ के पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर पांडव कालीन माना जाता है। मंदिर कत्यूर शैली में निर्मित है। भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर में मनुष्य को पूजा करने का अधिकार सिर्फ एक दिन के लिए ही है। माना जाता है कि इस मंदिर में नारद 364 दिन भगवान नारायण की पूजा करते हैं और केवल एक दिन ही मनुष्य यहां पूजा कर सकता है।

यह मंदिर आम जनों हेतु पूरे साल में केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है। पौराणिक मान्यता है कि जब राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने द्वारपाल बनने का आग्रह किया तो नारायण ने स्वीकार कर उनके साथ पाताललोक चले गए, तब माता लक्ष्मी नारायण की खोजबीन करते हुए नारद ऋषि के पास पहुंची, नारद जी ने उन्हे बताया कि भगवान विष्णु पाताललोक में राजा बलि के यहां है, यदि माता आप श्रावण माह की पूर्णिमा को पाताल लोक जाकर राजा बलि को राखी बांधे, इसके बदले नारायण को वापस मांग सकते हो, माता ने यही किया और भगवान विष्णु पाताल लोक से मुक्त हुए।

मान्यता है कि मां लक्ष्मी के साथ नारद ऋषि भी पाताल लोक गए, उनकी अनुपस्थिति में उस दिन पूजा गांव के ही एक पुजारी द्वारा की गई। माना यह भी जाता है की इस मंदिर से पाताल लोक के लिए रास्ता है इसी मार्ग से भगवान विष्णु आए और यहां वंशी नारायण मंदिर में भगवान विष्णु ने दर्शन दिए थे। तब से ही यह प्रथा चली की रक्षा बंधन के दिन यहां विष्णु भगवान की बड़ी ही धूमधाम से पूजा कर उन्हें राखी बांधते हैं।

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

लेखन ✍️©️ प्रशांत मैठाणी copy right

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