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मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश*  *मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं*
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मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ*
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मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘*
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आम महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “बीज संजीवनी अभियान” का किया शुभारंभ*
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विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम बढ़ी आगे* *जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विश्वविद्यालय का किया भ्रमण*
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में प्रदेश में ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी, देहरादून, डॉ आशीष चौहान ने दिए छुट्टी के आदेश, जानिए ये खबर
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13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस

13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस

रेडियो मनोरंजन एवं संचार का सशक्त माध्यम है, रेडियो के महत्व को देखते हुए, सन् 2011 में यूनेस्को के सदस्यों ने 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

सबसे पहले भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र वसु ने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों पर वैज्ञानिक प्रयोग शुरू किए, उन्हें रेडियो विज्ञान का जनक माना जाता है।

सन् 1895 में गुलयेल्मो मारकोनी रेडियो के सिग्नल स्थानांतरित करने में कामयाब रहे, और 1896 में मारकोनी ने इसका पेटेंट अपने नाम करवा दिया। 1909 में मारकोनी को इसके लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। एक साथ एक से अधिक लोगों के लिए रेडियो का प्रसारण 1906 में शुरू हुआ, इसके बाद रेडियो प्रसारण के नए नए प्रयोग होने शुरू हो गए। 1917 के प्रथम विश्वयुद्ध के बाद सेना के अलावा अन्य लोगों के रेडियो चलाने पर प्रतिबंध लग गया था।

इस प्रकार 1895 से रेडियो की यात्रा शुरू हुई, और 1950 तक रेडियो की पहचान दुनियाभर में बन गई। रेडियो को लोग ध्यान से सुनते थे, तथा रेडियो द्वारा प्रसारित सूचना या समाचार को प्रमाणिक माना जाता था। एक समय था जब संचार माध्यमों में रेडियो की महत्वपूर्ण भूमिका थी। लोग रेडियो के द्वारा देश विदेश के समाचार सुनने के अलावा भरपूर मनोरंजन भी करते थे।

कुछ वर्ष पहले तक रेडियो का बहुत बड़ा क्रेज था, शादी ब्याह में रेडियो उपहार के रूप में दिया जाता था। हर घर में एक रेडियो होता था। उस समय चाभी वाली घड़ी होती थी जिसमे 24 घंटे में एक बार चाभी भरनी होती थी, जब कभी घड़ी में टाइम की सेटिंग खराब हो जाती थी तो रेडियो के द्वारा ही घड़ी का टाइम ठीक किया जाता था।

समय के साथ रेडियो ने भी कई बदलाव किए हैं, पहले आकाशवाणी केंद्र का खुलने और बंद होने का और समाचार, गीत संगीत आदि का समय निश्चित होता था, लेकिन अब एफएम के रूप में कई बदलाव हुए हैं। जो श्रोताओं को पसंद भी आ रहे हैं।

बदलते समय के साथ रेडियो की उपयोगिता और महत्व कम होने लगा। वर्तमान समय में युवाओं को रेडियो का महत्व समझाने के लिए रेडियो दिवस की शुरुआत की गई।

 

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