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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम*
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प्रधानमंत्री ने फिर व्यक्त की बाबा केदार में अटूट श्रद्धा* *सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए, केदारनाथ धाम के पिछले दौरों की तस्वीरें जारी की*
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मुख्यमंत्री धामी पहुंचे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा,*  *विकास कार्यों का लिया जायजा*  *शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडल*
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा के लिए प्रेषित की शुभकामनाएं* *डिजिटल उपवास पर रहते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें तीर्थयात्री*
श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ के कपाट विधि-विधान के साथ खुले*
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सीएम धामी का विपक्ष पर तीखा प्रहार — “महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने वालों को मातृशक्ति देगी करारा जवाब”*
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युवा संत बागेश्वर धाम आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी का परमार्थ निकेतन में भव्य स्वागत। चिदानंद सरस्वती जी के साथ प्रात: कालीन गंगा आरती में हुए सम्मिलित।

युवा संत बागेश्वर धाम आचार्य धीरेंद्र शास्त्री जी का परमार्थ निकेतन में भव्य स्वागत। चिदानंद सरस्वती जी के साथ प्रात: कालीन गंगा आरती में हुए सम्मिलित।

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आज प्रातःकाल सनातन संस्कृति के अग्रदूत युवासंत बागेश्वर धाम, आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी पधारे। परमार्थ गुरूकुल के आचार्यों, ऋषिकृमारों और परमार्थ परिवार ने वेदमंत्रों, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा कर सनातन संस्कृति के अग्रदूत युवा संत बागेश्वर धाम, आचार्य श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का अभिनन्दन किया।

परमार्थ परिवार ने वंदन और अभिनन्दन के पलों में दिव्य आनंद की अनुभूति को महसूस किया। समस्त सनातन जगत को पूज्य स्वामी जी और बागेश्वर धाम आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी दोनों दिव्य विभूतियों का सूर्य की स्वर्णिम किरणों के साथ ही पावन सान्निध्य व आशीर्वाद प्राप्त हुआ। दोनों विभूतियों के पावन सान्निध्य में सभी ने माँ गंगा जी का पूजन व अभिषेक व आरती में भाग लिया।

बागेश्वर धाम श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का आज प्रातः परमार्थ निकेतन मे आगमन हुआ। उन्होंने बड़ी ही विन्रमता, विनय और वंदन के साथ स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को मार्च माह में बागेश्वर धाम में 151 कन्याओं के सामूहिक विवाह महोत्सव में युगल दम्पति को आशीर्वाद  देने हेतु आमंत्रित किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सनातन संस्कृति के अग्रदूत युवा संत आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री जी आदिगुरू शंकराचार्य के पदचिन्हों का अनुकरण करते हुये सनातन धर्म ज्ञान रूपी मशाल लेकर आगे बढ़ रहे हैं। सनातन धर्म को हर सांस में जीते हुये सनातन संस्कृति की अविरल धारा सनातन गंगा निरंतर प्रवाहित कर रहे हैं। गंगा की निर्मलता और सनातन की दिव्यता का दीप हर मनुष्य के हृदय में प्रज्वलित हो क्योंकि सनातन है तो हम हैं। सनातन है तो संस्कार, संस्कृति और जीवन के मूल्य है। युवाओं में सनातन की अखंड ज्योति जलती रहे, परिवारों में भारतीय संस्कृति के मूल, मूल्य और संस्कार स्थापित हो क्योंकि संस्कार है तो संसार है, संस्कार है तो परिवार है, संस्कार है तो जीवन का आधार है।

आचार्य श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि आज पूज्य स्वामी जी और माँ गंगा का पावन सान्निध्य पाकर अभिभूत हो गया हूँ। ये मिलन जीवंत व जागृत कर देने वाला है। मेरे लिये ये दिव्य पल करूणा, प्रेम, श्रद्धा, विश्वास के अद्भुत पल हैं इस दिव्यता के पलों को वंदन और अभिनन्दन करता हूं। परमार्थ निकेतन से पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य में निरंतर पर्यावरण संरक्षण का संदेश हम सभी को प्राप्त होता है। वास्तव में इस तट से सनातन के संदेश के साथ संस्कृति और संस्कारों का उद्घोष प्रतिदिन होता है। उन्होंने स्वामी जी के पावन सान्निध्य में गंगा तट पर कथा आयोजित करने की इच्छा व्यक्त करते हुये कहा कि यह स्थान वास्तव में अपार शान्ति प्रदान करने वाला है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी को हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का दिव्य पौधा आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया।

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