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कैंसर को महामारी व सुनामी की ओर बढ़ने से रोके। पारम्परिक व प्राकृतिक जीवन शैली अपनायें। योगगुरु स्वामी रामदेव और स्वामी चिदानन्द सरस्वती की भेंटवार्ता

कैंसर को महामारी व सुनामी की ओर बढ़ने से रोके। पारम्परिक व प्राकृतिक जीवन शैली अपनायें। योगगुरु स्वामी रामदेव और स्वामी चिदानन्द सरस्वती की भेंटवार्ता

ऋषिकेश/दिल्ली। आज विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती और योगगुरु बाबा रामदेव के बीच कैंसर की रोकथाम पर बातचीत हुई। चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि कैंसर एक बीमारी नहीं है, बल्कि बीमारियों का एक समूह है जो असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन और वृद्धि के कारण होता है। कैंसर के अनेक रूप हैं, इसलिये इसके उपचार के लिये एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

इस विषय में स्वामी चिदानन्द सरस्वती और योगगुरू स्वामी रामदेव के बीच चर्चा हुई। स्वामी जी ने कहा कि स्वामी रामदेव , आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। वे योग और आयुर्वेद के माध्यम से लोगों की जीवनशैली बदलने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। प्राचीन काल से ही आयुर्वेद का   रोगों के निदान के साथ साथ एक स्वस्थ जीवन शैली जीने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कई रोगों का निदान आयुर्वेद के द्वारा सम्भव हुआ है।

देश में कैंसर के उपचार, रोकथाम और देखभाल के लिये जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।  कैंसर के निवारण के लिये स्वस्थ जीवन शैली अति आवश्यक है, तंबाकू के उपयोग को कम करना तथा नियमित जाँच और टीकाकरण के महत्त्व पर जोर देना अत्यंत आवश्यक है।

स्वामी जी ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारियों को दूर रखने के लिये स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। स्वस्थ रहने के लिये स्वच्छ, सुरक्षित व संतुलित आहार के साथ सक्रिय जीवनशैली, नियमित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है।

कैंसर होने का कोई एक ही कारण नहीं होता, भारत में कैंसर के मामले बढ़ने के कई कारण हैं। उनमें से प्रमुख कारण  जीवनशैली, अनुचित आहार संबंधी आदतें, लगातार मांसाहारी भोजन ग्रहण करना, रासायनिक प्रदूषण के साथ योग व व्यायाम की कमी। “असंतुलित जीवनशैली, लंबे समय तक काम करना, तनावपूर्ण जीवन, धूम्रपान, शराब का सेवन, अधिक गर्भनिरोधक का उपयोग आदि अनेक ऐसे कारण है जिनके कारण कैंसर की वृद्धि हो रही है।

कैंसर से बचने के लिए दैनिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण योगदान है, धूम्रपान, तंबाकू, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से परहेज, मोटापे, से बचना, दैनिक व्यायाम और ध्यान (मेडिटेशन) जिससे मस्तिष्क शांत रहता है इससे कैंसर की घटनाओं को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

कैंसर की रोकथाम और उससे लड़ने के लिए अधिकांश मदद हमारे द्वारा खाए जाने वाले आहार से मिलती है, गुणवत्ता, मात्रा और पोषण स्वास्थ्य का एक प्रमुख निर्धारक और कैंसर के खतरे का एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह अनुमान लगाया गया है कि लगभग 30-40 प्रतिशत कैंसर को अकेले आहार और जीवनशैली उपायों से रोका जा सकता है। हालांकि यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्वस्थ आहार क्या है, विषाक्त और कोशिकाओं के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों कौन से है। न केवल भोजन की गुणवत्ता, बल्कि सेवन की गई भोजन की मात्रा भी कैंसर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुरुषों में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 14 प्रतिशत और महिलाओं में 20 प्रतिशत मौतें मोटापे के कारण होती हैं। कम खाना, लेकिन शरीर के सामान्य वजन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पोषण कैंसर के खिलाफ एक सुरक्षात्मक कार्य करता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां आदि जैसे पौधे-आधारित उत्पादों से समृद्ध आहार का सेवन करने से विभिन्न प्रकार के कैंसर के विकास के जोखिमों को कम किया जा सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि आहार में पौधों पर आधारित भोजन की मात्रा बढ़ाकर 75 प्रतिशत कोलोरेक्टल कैंसर को रोका जा सकता है।

आइए हम सभी स्वस्थ जीवन के लिए इन स्वस्थ जीवनशैली के विकल्पों को अपनाने का संकल्प लें।

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