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मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश*  *मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं*
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मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ*
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मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘*
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आम महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “बीज संजीवनी अभियान” का किया शुभारंभ*
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विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम बढ़ी आगे* *जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विश्वविद्यालय का किया भ्रमण*
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में प्रदेश में ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी, देहरादून, डॉ आशीष चौहान ने दिए छुट्टी के आदेश, जानिए ये खबर
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रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं* *धामी सरकार की पहल : सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन तलाशने की कवायद*

भारतीय न्यायाधीश, लेखक एवं समाज-सुधारक श्री महादेव गोविन्द रानाडे जी की जयंती पर भावभीनी श्रद्धाजंलि। श्री राम जन्मभूमि महोत्सव को महा महोत्सव बनाने हेतु बढ-चढ़ कर सहभाग करने का आह्वान। 22 जनवरी, 2024 का दिन भारत व भारतीयों के लिये ऐतिहासिक दिन। स्वामी चिदानन्द सरस्वती

भारतीय न्यायाधीश, लेखक एवं समाज-सुधारक श्री महादेव गोविन्द रानाडे जी की जयंती पर भावभीनी श्रद्धाजंलि। श्री राम जन्मभूमि महोत्सव को महा महोत्सव बनाने हेतु बढ-चढ़ कर सहभाग करने का आह्वान। 22 जनवरी, 2024 का दिन भारत व भारतीयों के लिये ऐतिहासिक दिन। स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 18 जनवरी। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देशवासियों का आह्वान करते हुये श्री राम जन्मभूमि महोत्सव को महा महोत्सव बनाने हेतु बढ-चढ़ कर सहभाग करने का संदेश दिया। प्रभु श्री राम ने सभी को गले लगाया। चाहे शबरी हों या केवट, गीधराज हों या निषादराज, सभी को अद्भुत प्रेम दिया। वे एक छोटी सी गिलहरी तक का ध्यान रखते हैं, उन्होंने सभी को अपनाया, प्रेम से झूठे बेर भी खाये ऐसी ही करूणा एवं त्याग की पराकाष्ठा अब हम सभी को दिखाना है। 22 जनवरी, 2024 का दिन भारत व भारतीयों के लिये ऐतिहासिक दिन है, आईये सभी मिलकर इस उत्सव को महाउत्सव बनाये।

महाराष्ट्र के सुकरात, प्रसिद्ध विद्वान, समाज सुधारक, न्यायविद, भारतीय राष्ट्रवादी तथा भारत की महान विभूति महादेव गोविन्द रानाडे जी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि अपना सम्पूर्ण जीवन सामाजिक कार्यों और नारी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में समर्पित करने वाले महादेव गोविंद रानाडे जी ने अपने समय मंे बाल विवाह का घोर विरोधी किया तथा विधवा पुनर्विवाह का प्रबल समर्थन किया ताकि नारियों को गरिमामय जीवन प्राप्त हो सके, ये दोनों ही बड़े ही क्रान्तिकारी कदम हैं बाल विवाह का विरोध और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन अद्भुत दृष्टि थी उनकी। उन्होंने पूरा जीवन महिलाओं कोे आत्मनिर्भर बनाने और भावनात्मक दृष्टि से स्वतंत्र बनाने पर जोर दिया ऐसे महान व्यक्तित्व की समाजसेवा और देशभक्ति को नमन।

श्री महादेव गोविंद रानाडे जी प्रार्थना समाज के संस्थापक सदस्य थे उन्होंने तत्कालीन प्रचलित सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन करने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने अपनी पत्नी रमाबाई को शिक्षित किया, वे एक उत्कृष्ट शिक्षक भी थे जिन्होंने कई स्कूलों की स्थापना की। रानाडे सामाजिक सम्मेलन आंदोलन के संस्थापक थे, जिसके माध्यम से बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह, विवाह और अन्य सामाजिक कार्यों की उच्च लागत और विदेश यात्रा पर जाति प्रतिबंध के खिलाफ अपने सामाजिक सुधार प्रयासों का निर्देशन किया।

उन्होंने भारतीय अर्थशास्त्र और मराठा इतिहास के बारे में किताबें लिखीं। भारतीय समाज को मानवीकृत और समान बनाने के उनके प्रयास महिलाओं पर केंद्रित थे। उन्होंने पर्दा प्रथा विरोधी अभियान चलाया ।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई महापुरूषों ने सामाजिक सुधारों में योगदान दिया परन्तु जस्टिस श्री रानाडे जी को समाज, धार्मिक सुधार, शिक्षा और देश के इतिहास के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सदैव याद किया जाएगा। आज उनकी जयंती पर उनके द्वारा शुरू किये गये कार्यो को गति प्रदान कर श्रद्धाजंलि अर्पित करें यही उनके लिये सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

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