*मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से गैरसैंण की पेयजल आपूर्ति को मिलेगा सुदृढ़ आधार, रामगंगा नदी पर बांध निर्माण परियोजना को मिली वित्तीय स्वीकृति *
– **गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम, ₹122.6891 करोड़ की परियोजना को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति*
– **मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत रामगंगा नदी पर बनेगा पेयजल आपूर्ति बांध, प्रथम किश्त के रूप में ₹2.454 करोड़ की धनराशि स्वीकृत**
– **गैरसैंण की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए धामी सरकार प्रतिबद्ध, परियोजना के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर रहेगा विशेष जोर**
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने तथा आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत चमोली जनपद के गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रामगंगा नदी पर बांध निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना को महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के लिए कुल ₹122.6891 करोड़ की लागत पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रथम किश्त के रूप में ₹2.454 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
यह परियोजना गैरसैंण नगर तथा उससे लगी आबादी की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। रामगंगा नदी पर प्रस्तावित बांध निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
*मुख्यमंत्री घोषणा के अनुरूप परियोजना को मिली स्वीकृति*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अंतर्गत प्रस्तावित *Construction of Dam across Ramganga River for drinking water supply of Gairsain town and adjoining population in District Chamoli* परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि की व्यवस्था की गई है। शासन स्तर से जारी आदेश के अनुसार परियोजना की कुल लागत ₹12,268.91 लाख अर्थात ₹122.6891 करोड़ निर्धारित है। इसमें प्रथम चरण के लिए पूर्व में स्वीकृत ₹24.76 लाख की धनराशि भी सम्मिलित है।
परियोजना के लिए प्रथम किश्त के रूप में कुल स्वीकृत लागत के लगभग 2 प्रतिशत के बराबर ₹2.454 करोड़ की धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम आहरित कर उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। यह धनराशि परियोजना के कार्यों को प्रारंभ करने के लिए टोकन धनराशि के रूप में प्रदान की गई है।
*SASCI योजना के अंतर्गत होगी धनराशि की व्यवस्था*
शासनादेश के अनुसार परियोजना के लिए स्वीकृत प्रारंभिक धनराशि का समायोजन भारत सरकार से *Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment for 2026-27 (SASCI)* के अंतर्गत धनराशि प्राप्त होने पर राज्य सेक्टर से किया जाएगा। परियोजना के लिए आगे की धनराशि भी इसी योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाएगी।
इस व्यवस्था से परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग वास्तविक आवश्यकता के अनुसार किस्तों में किया जाएगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उपलब्ध कराई गई धनराशि का निर्धारित समयसीमा में उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
*गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी मानकों पर विशेष जोर*
राज्य सरकार ने परियोजना के क्रियान्वयन में निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी उपयुक्तता और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बांध एवं बैराज के निर्माण से संबंधित संरचनात्मक डिजाइन और ड्राइंग किसी मान्यता प्राप्त संस्था से जांच एवं सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप से अपनाई जाए। सिंचाई विभाग को बांध एवं बैराज के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले क्षेत्रीय मुख्य अभियंता द्वारा कार्यस्थल का निरीक्षण किया जाएगा। पेयजल योजना के लिए सबसे मितव्ययी एवं तकनीकी रूप से व्यवहार्य विकल्प का चयन करते हुए यह प्रमाणित करना होगा कि इससे अधिक किफायती विकल्प उपलब्ध नहीं है। आवश्यकतानुसार मृदा परीक्षण तथा भूगर्भीय उपयुक्तता से संबंधित आख्या प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निर्माण में उपयोग होने वाली रेत, बजरी, ईंट, सीमेंट, स्टील पाइप तथा अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही निर्माण कार्य का तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है।
*पेयजल उपलब्धता और प्रभावित क्षेत्रों के हितों का रखा जाएगा ध्यान*
परियोजना के निर्माण के दौरान जल स्रोत में डिजाइन अवधि तक आवश्यक न्यूनतम जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बांध निर्माण के कारण डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रभावित होने वाले गांवों को निर्माण कार्य के दौरान तथा निर्माण पूर्ण होने के बाद भी निर्बाध रूप से जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
निर्माण कार्यों की योजना इस प्रकार तैयार करने पर जोर दिया गया है कि परियोजना के विभिन्न घटकों का चरणबद्ध एवं जोनवार निर्माण हो और निर्मित संरचनाओं का समुचित उपयोग किया जा सके। यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में बजट की अनुपलब्धता के कारण कार्य रोकना पड़े, तो उसे तकनीकी सुरक्षा एवं उपयोगिता की दृष्टि से उपयुक्त चरण पर ही रोका जाएगा।
*मितव्ययता और वित्तीय अनुशासन के लिए कड़े प्रावधान*
परियोजना की लागत के प्रभावी प्रबंधन के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। कार्यदायी संस्था को तकनीकी स्वीकृति देते समय केवल अपरिहार्य कार्यों एवं मदों को ही आगणन में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। निविदा स्वीकृत होने पर यदि स्वीकृत लागत की तुलना में बचत होती है, तो बची हुई धनराशि शासन को वापस करनी होगी। अपरिहार्य परिस्थितियों में अतिरिक्त कार्य कराने से पहले सक्षम अधिकारी का अनुमोदन प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, निर्धारित दरों, श्रम घटक और कार्य की गुणवत्ता के अनुरूप व्यय सुनिश्चित किया जाएगा। उपकरणों की खरीद में लागत प्रभावशीलता एवं ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखने तथा जहां तक संभव हो, निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदेश में निर्मित स्थानीय सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और राज्य को राजस्व प्राप्ति को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, परियोजना में किसी प्रकार का अनधिकृत वित्तीय विचलन नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक मद पर उसी सीमा तक व्यय किया जाएगा, जितनी धनराशि स्वीकृत की गई है। प्राक्कलन का पुनरीक्षण स्वीकार न किए जाने का प्रावधान भी किया गया है। योजना के अंतर्गत खरीद एवं निर्माण संबंधी कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 सहित लागू नियमों और शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
*पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होगा क्रियान्वयन*
परियोजना के प्रभावी अनुश्रवण के लिए कार्यस्थल पर सूचना पट्ट लगाया जाएगा, जिसमें स्वीकृत कार्य का नाम, स्वीकृति वर्ष, स्वीकृत लागत, कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार का नाम अंकित किया जाएगा। कार्य प्रारंभ होने से पहले, निर्माण के दौरान तथा कार्य समाप्त होने के बाद की तस्वीरें और वीडियो भी सुरक्षित रखे जाएंगे।
कार्यदायी संस्था के साथ निर्धारित प्रारूप में समझौता ज्ञापन (MOU) हस्ताक्षरित करना, परियोजना को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड करना तथा वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का विवरण शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। संबंधित अधिशासी अभियंता को परियोजना के औचित्य, आगणन की लागत एवं दरों की उपयुक्तता तथा कार्य की समयबद्धता और गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।
स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। परियोजना के क्रियान्वयन में बजट मैनुअल, वित्तीय हस्तपुस्तिका, अधिप्राप्ति नियमावली तथा मितव्ययता से संबंधित शासनादेशों के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा।
*पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचनाओं के विकास, पेयजल सुविधाओं के विस्तार और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण परियोजना को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परियोजना के पूर्ण होने पर गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र की दीर्घकालिक पेयजल आवश्यकताओं की योजना बनाने तथा भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी आधार तैयार होगा।
**मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो, ताकि विकास का लाभ आमजन तक पहुंचे।**


