Headline
सफलता का आधार केवल अंक नहीं, चरित्र और संस्कार भी जरूरी : डीजी सूचना बंशीधर तिवारी*
सफलता का आधार केवल अंक नहीं, चरित्र और संस्कार भी जरूरी : डीजी सूचना बंशीधर तिवारी*
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखंड की आधारशिला : मुख्यमंत्री*
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखंड की आधारशिला : मुख्यमंत्री*
प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, मुख्यमंत्री ने बढ़ाया उत्साह*
प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, मुख्यमंत्री ने बढ़ाया उत्साह*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय कारगिल दिवस पर वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं को किया सम्मानित*
मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए ₹ 62 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।*
एसजीएसटी संग्रहण में 24 फीसदी की वृद्धि* *उत्तराखण्ड में राज्य कर विभाग की उल्लेखनीय सफलता* *12 फीसदी बढ़ा कुल जीएसटी संग्रहण*
मुख्यमंत्री ने ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को दिखायी हरी झंडी*  *शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि*
मुख्यमंत्री ने ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को दिखायी हरी झंडी* *शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि*
उत्तराखंड में नकल माफियाओं पर एक और बड़ी कार्रवाई, यूटीयू परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार* *सीएम पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देश, नकल माफियाओं को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी*
मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश*  *मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं*
मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश* *मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं*

कानूनी सख्ती से ही थमेंगी बाल तस्करी की घटनाएं

कानूनी सख्ती से ही थमेंगी बाल तस्करी की घटनाएं

सुरेश राजपूत
बाल तस्करी के खिलाफ कई सख्त कानूनी प्रावधानों के बावजूद भारत में यह समस्या नासूर बनती जा रही है। दिल्ली में सीबीआइ की छापेमारी के दौरान अस्पताल से नवजात बच्चे चुराने वाले गिरोह के पर्दाफाश से फिर यह तथ्य उभरा है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों में कानून का कोई खौफ नहीं है। बच्चों की तस्करी पर भारी जुर्माने के साथ उम्रकैद तक का प्रावधान होने के बावजूद यह कड़वी हकीकत है कि ऐसे दस फीसदी से भी कम मामले दोषियों को सजा तक पहुंच पाते हैं। मुकदमों की पैरवी सही तरीके से नहीं होने के कारण अपराधी बच निकलते हैं और वे फिर बाल तस्करी में लिप्त हो जाते हैं।

बाल तस्करी की कोई एक वजह नहीं है। लेकिन चिंता की बात यह भी है कि देश में युवाओं के एक वर्ग की सोच में बदलाव भी परोक्ष रूप से बाल तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। एक सर्वे में खुलासा हुआ था कि भारत के नौ फीसदी युवा शादी तो करना चाहते हैं लेकिन बच्चे नहीं पैदा करना चाहते। संतान सुख के लिए उन्हें बच्चे खरीदने से परहेज नहीं है। हैरत की बात यह है कि देश के ढाई करोड़ से ज्यादा अनाथ बच्चों में से किसी को गोद लेने का विकल्प होने के बावजूद ऐसे युवा कई बार बाल तस्करी करने वालों से संपर्क तक साध लेते हैं। बाल तस्करी की गंभीर समस्या पर हमारा ध्यान तभी जाता है, जब किसी गिरोह का पर्दाफाश होता है या बाल तस्करी को लेकर कोई रिपोर्ट जारी होती है।

पिछले साल एक एनजीओ की रिपोर्ट में बताया गया था कि 2016 से 2022 के बीच बाल तस्करी के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जबकि आंध्र प्रदेश और बिहार क्रमश: दूसरे, तीसरे नंबर पर थे। इस अवधि में मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना में भी कई मामले दर्ज हुए। पिछले साल संसद में पेश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 2021 में हर दिन औसतन आठ बच्चों की तस्करी हुई। देश के ही भीतर यह तस्करी होती है लेकिन संगठित गिरोह कुछ बच्चों की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी तस्करी करते हैं।

एनसीआरबी के मुताबिक 2019 से 2021 के बीच देश में 18 साल से कम उम्र की 2.51 लाख लड़कियां लापता हुईं। इनमें से ज्यादातर मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ और ओडिशा की थीं। बाल तस्करी की समस्या से भारत ही नहीं, कई दूसरे देश भी जूझ रहे हैं। सरकार और समाज को इससे मिलकर निपटना होगा। इस समस्या की जड़ में गरीबी भी है। इसे ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यावहारिक और ठोस नीति बनाई जानी चाहिए कि बाल तस्करी के समूल उन्मूलन की जमीन तैयार हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top