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उत्तराखंड के फिल्मकारों ने NHRC में जीता राष्ट्रीय सम्मान देहरादून की सुद्दोवाला जेल पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘सेकंड चांस’ को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

अप्रैल 2025 | NHRC भवन, नई दिल्ली
उत्तराखंड के फिल्मकारों ने NHRC में जीता राष्ट्रीय सम्मान
देहरादून की सुद्दोवाला जेल पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘सेकंड चांस’ को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
526 प्रतियोगियों में से चुनी गई — NHRC अधिकारियों ने उत्तराखंड सरकार व जेल प्रशासन की भी की सराहना
नई दिल्ली। उत्तराखंड के युवा फिल्मकारों शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ‘ह्यूमन राइट्स शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता’ में अपनी डॉक्युमेंट्री ‘सेकंड चांस’ के साथ राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। देशभर से आई 526 प्रविष्टियों और 24 भाषाओं के बीच, कठोर तीन-चरणीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल सात फिल्मों को पुरस्कृत किया गया — जिनमें ‘सेकंड चांस’ भी शामिल रही।
शुभम शर्मा रुड़की, जिला हरिद्वार के मूल निवासी हैं और वर्तमान में देहरादून में कार्यरत हैं। उनके सहनिर्माता रवि कर्णवाल भी उत्तराखंड में ही सक्रिय हैं। यह पुरस्कार NHRC अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन, सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
सुद्दोवाला जेल की दीवारों से उठी आवाज़
‘सेकंड चांस’ देहरादून की सुद्दोवाला जेल में बंद कैदियों के जीवन, उनके पुनर्वास और मानवाधिकारों की संवेदनशील पड़ताल है — क्या समाज उन्हें दूसरा मौका देता है? NHRC अध्यक्ष ने कहा कि ऑडियो-विजुअल माध्यम अवचेतन मन को छूने की अद्भुत क्षमता रखता है। NHRC के वरिष्ठ अधिकारियों ने देहरादून जेल प्रशासन और उत्तराखंड सरकार के सहयोग की भी विशेष सराहना की, जिसके चलते यह डॉक्युमेंट्री बन सकी और प्रदेश को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली।
“यह पुरस्कार हमें नहीं, उन हजारों कैदियों को मिला है जिनकी ज़िंदगी को हमने अपनी फिल्म में दिखाने की कोशिश की।”
— शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल
फिल्म की टीम
निर्देशक: हर्षित मिश्रा | DOP: निवान प्राचुर्या | निर्माता: दीपा धामी
फिल्मकारों का परिचय
शुभम शर्मा NSD और FTII पुणे से प्रशिक्षित हैं तथा रंगमंच एवं फिल्म निर्देशन में स्नातकोत्तर में स्वर्णपदक विजेता हैं। ‘कश्मीर फाइल्स’, ‘बधाई दो’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके शुभम ने निर्देशन और प्रोडक्शन में भी अपनी पहचान बनाई है।
रवि कर्णवाल पद्मश्री निरंजन गोस्वामी के शिष्य, प्रशिक्षित अभिनेता, लेखक और अभिनय कोच हैं। दोनों की साझा फिल्मों — ‘अलार्मघड़ी’, ‘चप्पल’, ‘सेकंड चांस’, ‘डस्टर’, ‘अल्पविराम’ सहित अनेक लघुफिल्मों — ने देशभर के 50 से अधिक पुरस्कार अर्जित किए हैं।
दीपा धामी (निर्माता) — संक्षिप्त परिचय
दीपा धामी एक संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्म निर्माता हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना है। वे मानती हैं कि फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जागरूकता और परिवर्तन का सशक्त उपकरण भी है।
उन्होंने एम.जेपी. रुहेलखंड विश्वविद्यालय से विधि (LLB) की शिक्षा प्राप्त की है, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के विषय में गहरी समझ प्रदान की। इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने ‘सेकंड चांस’ जैसी डॉक्युमेंट्री के निर्माण में विशेष योगदान दिया, जो जेल में बंद कैदियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों पर एक संवेदनशील दृष्टि प्रस्तुत करती है।
दीपा धामी का समर्पण और दृष्टिकोण इस फिल्म की आत्मा को मजबूती प्रदान करता है, और समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में उनके प्रयास सराहनीय हैं।
रुड़की और उत्तराखंड की गलियों से निकलकर नई दिल्ली के NHRC सभागार तक — शुभम और रवि की यह यात्रा प्रदेश के हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है। उत्तराखंड सरकार और सुद्दोवाला जेल प्रशासन को भी इस राष्ट्रीय सम्मान में साझीदार होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

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