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उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित, बालिकाओं ने मारी बाजी इंटरमीडिएट में 85.11 व हाईस्कूल में 92.10 फीसदी रहा कुल परीक्षा परिणाम
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल हुए सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया*
चारधाम यात्रा से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई, भ्रामक वीडियो पर FIR दर्ज*  *आस्था पर प्रहार नहीं सहेंगे: चारधाम यात्रा पर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा*
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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम*
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प्रधानमंत्री ने फिर व्यक्त की बाबा केदार में अटूट श्रद्धा* *सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए, केदारनाथ धाम के पिछले दौरों की तस्वीरें जारी की*
मुख्यमंत्री धामी ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान की गहन समीक्षा की*
मुख्यमंत्री धामी पहुंचे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा,*  *विकास कार्यों का लिया जायजा*  *शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडल*
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भारत के पहले ‘लेखक गांव’ में सजेगा 7 दिवसीय ‘विरासत’ कला उत्सव*

*भारत के पहले ‘लेखक गांव’ में सजेगा 7 दिवसीय ‘विरासत’ कला उत्सव*

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं स्पर्श हिमालय फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में भारत के पहले ‘लेखक गांव’ थानों, देहरादून में 13 से 19 मार्च 2026 तक सात दिवसीय भव्य ‘विरासत कला उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय कला, संस्कृति, साहित्य और परंपराओं की समृद्ध विरासत को समर्पित इस विशेष उत्सव में देशभर के कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी एक मंच पर एकत्र होकर भारतीय सांस्कृतिक विविधता के विविध रंगों को प्रस्तुत करेंगे।
लेखक गांव में प्रतिदिन सायं 6 बजे से आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव में कविता, संगीत, नृत्य, नाटक और लोकसंस्कृति के विविध आयामों की आकर्षक प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने को मिलेंगी। उत्सव का शुभारंभ 13 मार्च को भव्य कवि सम्मेलन से होगा, जिसमें काव्य की विभिन्न विधाओं के माध्यम से श्रोताओं को साहित्यिक रस का अनुभव कराया जाएगा।
इसके बाद कार्यक्रमों की श्रृंखला में शास्त्रीय गायन और वादन की प्रस्तुतियां भारतीय संगीत परंपरा की गरिमा और गहराई को अभिव्यक्त करेंगी। इसी क्रम में शास्त्रीय नृत्य (फ्यूजन) तथा ओडिशी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति को मंच पर जीवंत करेंगी।
उत्सव के अंतर्गत नाट्य प्रस्तुतियों का भी विशेष आकर्षण रहेगा, जिनमें समकालीन जीवन, सामाजिक संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करने वाले नाटकों का मंचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करते हुए लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां भी इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होंगी, जिनमें भारत की विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक बहुलता का सजीव चित्र देखने को मिलेगा।
उत्सव के समापन अवसर पर सूफी एवं कबीर गायन की प्रस्तुति के साथ-साथ नाट्य मंचन भी किया जाएगा, जो भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की गहराई को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करेगा।
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय और स्पर्श हिमालय फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित यह उत्सव साहित्य, कला और संस्कृति के समन्वय का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करेगा। साथ ही यह आयोजन लेखक गांव को एक जीवंत सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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