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भारत के पहले ‘लेखक गांव’ में सजेगा 7 दिवसीय ‘विरासत’ कला उत्सव*

*भारत के पहले ‘लेखक गांव’ में सजेगा 7 दिवसीय ‘विरासत’ कला उत्सव*

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं स्पर्श हिमालय फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में भारत के पहले ‘लेखक गांव’ थानों, देहरादून में 13 से 19 मार्च 2026 तक सात दिवसीय भव्य ‘विरासत कला उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय कला, संस्कृति, साहित्य और परंपराओं की समृद्ध विरासत को समर्पित इस विशेष उत्सव में देशभर के कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी एक मंच पर एकत्र होकर भारतीय सांस्कृतिक विविधता के विविध रंगों को प्रस्तुत करेंगे।
लेखक गांव में प्रतिदिन सायं 6 बजे से आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव में कविता, संगीत, नृत्य, नाटक और लोकसंस्कृति के विविध आयामों की आकर्षक प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने को मिलेंगी। उत्सव का शुभारंभ 13 मार्च को भव्य कवि सम्मेलन से होगा, जिसमें काव्य की विभिन्न विधाओं के माध्यम से श्रोताओं को साहित्यिक रस का अनुभव कराया जाएगा।
इसके बाद कार्यक्रमों की श्रृंखला में शास्त्रीय गायन और वादन की प्रस्तुतियां भारतीय संगीत परंपरा की गरिमा और गहराई को अभिव्यक्त करेंगी। इसी क्रम में शास्त्रीय नृत्य (फ्यूजन) तथा ओडिशी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति को मंच पर जीवंत करेंगी।
उत्सव के अंतर्गत नाट्य प्रस्तुतियों का भी विशेष आकर्षण रहेगा, जिनमें समकालीन जीवन, सामाजिक संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त करने वाले नाटकों का मंचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करते हुए लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां भी इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होंगी, जिनमें भारत की विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक बहुलता का सजीव चित्र देखने को मिलेगा।
उत्सव के समापन अवसर पर सूफी एवं कबीर गायन की प्रस्तुति के साथ-साथ नाट्य मंचन भी किया जाएगा, जो भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की गहराई को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करेगा।
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय और स्पर्श हिमालय फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित यह उत्सव साहित्य, कला और संस्कृति के समन्वय का एक अद्वितीय अवसर प्रदान करेगा। साथ ही यह आयोजन लेखक गांव को एक जीवंत सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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