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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम*
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प्रधानमंत्री ने फिर व्यक्त की बाबा केदार में अटूट श्रद्धा* *सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए, केदारनाथ धाम के पिछले दौरों की तस्वीरें जारी की*
मुख्यमंत्री धामी ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान की गहन समीक्षा की*
मुख्यमंत्री धामी पहुंचे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा,*  *विकास कार्यों का लिया जायजा*  *शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडल*
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा के लिए प्रेषित की शुभकामनाएं* *डिजिटल उपवास पर रहते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें तीर्थयात्री*
श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ के कपाट विधि-विधान के साथ खुले*
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सीएम धामी का विपक्ष पर तीखा प्रहार — “महिलाओं के अधिकारों में बाधा डालने वालों को मातृशक्ति देगी करारा जवाब”*
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*गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले।**प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नाम से दोनों धामों में की गई पहली पूजा।*
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चारधाम यात्रा 2026 को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने का ऐतिहासिक पहल ,* *ड्रोन से होगी कूड़ा और प्लास्टिक वेस्ट की मॉनिटरिंग*

एनसीईआरटी विवाद- सुप्रीम कोर्ट ने किताब की सभी कॉपियां जब्त करने के दिए आदेश

एनसीईआरटी विवाद- सुप्रीम कोर्ट ने किताब की सभी कॉपियां जब्त करने के दिए आदेश

माफी से काम नहीं चलेगा- सुप्रीम कोर्ट की एनसीईआरटी को कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एक पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े विवादित अंश को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए एनसीईआरटी को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और जब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, मामले की निगरानी जारी रहेगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित किताब के वितरण पर तत्काल रोक लगाने के साथ-साथ उसकी सभी प्रतियों को वापस लेने और डिजिटल संस्करण हटाने के आदेश दिए। पीठ ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर विषय है, जिसकी गहन जांच जरूरी है। अदालत ने शिक्षा विभाग और एनसीईआरटी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है और इससे न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। इसलिए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाएगी।

इस बीच, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त माफी जताई, जबकि एनसीईआरटी ने भी विवादित अंश हटाने और संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी करने की बात कही है। संस्था ने अपनी ओर से इसे अनजाने में हुई गलती बताते हुए खेद प्रकट किया है।

मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। अदालत ने दोहराया कि किसी भी संस्था या व्यक्ति को न्यायपालिका की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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