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थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुनी जनजाति समाज की समस्याएं*
युवा शक्ति ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस कर्मियों के कल्याण हेतु नई टिहरी में हुई निःशुल्क भूमि आवंटित*
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*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एनडीआरएफ बटालियन गदरपुर का किया भ्रमण, जवानों से संवाद कर आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की ली जानकारी*
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मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए ₹ 227 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।*
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में सुनीं जन समस्याएं*  *जन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के दिए निर्देश*
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सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध जनभागीदारी से चलाना होगा प्रभावी अभियान : मुख्यमंत्री*
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स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री*
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फील्ड में रहकर वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं जिलाधिकारी देहरादून
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हमारे कर्मों और व्यवहार से किसी की अंतरात्मा आहत न हो।परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय अन्तरात्मा दिवस मनाया गया

हमारे कर्मों और व्यवहार से किसी की अंतरात्मा आहत न हो।परमार्थ निकेतन में अंतर्राष्ट्रीय अन्तरात्मा दिवस मनाया गया

ऋषिकेश। अंतर्राष्ट्रीय अंतरात्मा दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम् के दिव्य मंत्रों को आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमें शांति, स्वतंत्रता, न्याय, लोकतंत्र, सहिष्णुता और एकजुटता के सिद्धांतों का पालन करते हुए,  शांति की संस्कृति स्थापित करने के लिए मिलकर कार्य करना होगा। हम सबके प्रयास से ही वैश्विक शान्ति की स्थापना, सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ अंतर-सांस्कृतिक संवाद स्थापित हो सकता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि धरती पर जो भी जीव जीवन यापन कर रहे हैं, उन सभी को ‘‘न्याय, सहिष्णुता और शांति’’ के साथ जीवन जीने का अधिकार परमपिता परमात्मा की ओर से प्राकृतिक रूप से प्राप्त हैं। इसलिये अपने विवेक को जागृत कर इस संस्कृति को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। हम अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिये प्राकृतिक नियमों की अवहेलना नही कर सकते।

आज का दिन सार्वभौमिक स्तर पर मानवाधिकारों के संरक्षण का संदेश देता है ताकि हमारे कर्मों व व्यवहार से किसी की भी अंतरात्मा आहत न हो। वर्तमान समय में भय मुक्त और अभाव मुक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता है। साथ ही भविष्य की पीढ़ियों और राष्ट्रों को युद्ध के संकट से बचाने के लिए मानवाधिकार, सहिष्णुता, एकजुटता और शांति की संस्कृति को बढ़ावा देना वर्तमान समय की वैश्विक जरूरत है।

स्वामी जी ने कहा कि भारत, शान्ति की संस्कृति के लिये जीता है। भारत का नाम लेते ही भारत की स्वर्णिम आध्यात्मिक गाथा और एक शानदार युग याद आता है। इतिहास के किसी भी काल-खंड को देखंे तो भारत हमेशा से शान्ति की राह पर अग्रसर होता रहा है। चाहे वह भक्ति काल हो या पुनर्जागरण काल हो, भारत ने सबसे पहले शान्ति, सौहार्द, सहिष्णुता और सद्भाव को प्राथमिकता दी। भारतीय अध्यात्म, संस्कार, दर्शन, और संस्कृति हर युग में सृष्टि के शान्तिपूर्ण विकास के लिये ही थी। भारत पर अनेक बार आक्रमण हुये परन्तु उसका सामना हमेशा ही भारत ने डट कर किया और हमेशा मित्रता का हाथ आगे बढ़ाया।

आज भारत, नये भारत के निर्माण के दौर से गुजर रहा है। एक नई आबोहवा की तलाश में है। यूएई के अबूधाबी में निर्मित हिन्दू मन्दिर इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। यह केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का नहीं बल्कि इन्ट्रास्ट्रक्चर का भी प्रतीक है।

भारत की संस्कृति भेदभाव की नहीं बल्कि एकात्म भाव की संस्कृति है, वाद-विवाद की नहीं बल्कि संवाद की संस्कृति है। ’’भारत इज नाॅट ए पीस ऑफ लैण्ड बट इज ए लैण्ड ऑफ पीस’’ इसलिये विश्व की सभी संस्कृतियों की झलक भारत में देखने को मिलती है, जो पूरे विश्व के लिये एक उदाहरण है, प्रेरणा है और एक मिसाल है।

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