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अटल जयंती पर लेखक गांव में द्वितीय अटल स्मृति व्याख्यान माला का भव्य आयोजन* *राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन* *अटल प्रेक्षागृह के नाम से जाना जायेगा लेखक गांव का प्रेक्षागृह*

अटल जयंती पर लेखक गांव में द्वितीय अटल स्मृति व्याख्यान माला का भव्य आयोजन* *राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन* *अटल प्रेक्षागृह के नाम से जाना जायेगा लेखक गांव का प्रेक्षागृह*

*अटल जयंती पर लेखक गांव में द्वितीय अटल स्मृति व्याख्यान माला का भव्य आयोजन*
*राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन*
*अटल प्रेक्षागृह के नाम से जाना जायेगा लेखक गांव का प्रेक्षागृह*
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पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर लेखक गांव में द्वितीय अटल स्मृति व्याख्यान माला का शुभारम्भ राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह के कर कमलों से हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल ने अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि विचारों का अक्षय भंडार, महान कवि और दूरदर्शी चिंतक थे। वे अपनी कविताओं के माध्यम से हर भारतीय के हृदय में बसते हैं। उन्होंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री लेखक गांव के संरक्षक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को अटल स्मृति व्याख्यान माला तथा लेखक गांव से अटल के विचारों को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के उनके प्रयासों की सराहना की।
लेखक गांव प्रकाशन द्वारा अटल जी पर आधारित एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। अटल बाल काव्यांजलि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले आठ विद्यालयों के प्रतिभाशाली छात्रों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा अटल प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया गया तथा स्मारिका ‘धरती का स्वर्ग उत्तराखण्ड’ का विमोचन किया गया।
इससे पूर्व लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने सभी का स्वागत और आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अटल जी को भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे एक महान राजनेता होने के साथ-साथ संवेदनशील कवि भी थे। उनकी कविताएँ आज भी कठि न परिस्थितियों में कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है- बाधाएँ आती हैं आए, घिरे प्रलय की घोर घटाएँ’। उन्होंने कहा कि अटल जी के व्यक्तित्व में सागर सी गहराई और हिमालय सा धैर्य था। हम सभी राजनेताओं को अटल जी की कार्यशैली एवं उनके व्यवहार से प्रेरणा लेनी चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सरदाना ने अटल जी से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनकी अपने पत्रकारिता के आरंभिक दौर में 1975 में ही वाजपेयी जी से मेरी पहली मुलाकात हो गई थी।उसके बाद उनसे मिलना जुलना होता रहा। वर्ष 1995 में तो मैने अपने पुनर्वास अखबार में एक कवर स्टोरी के माध्यम से यह लिखा था कि अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बनेंगे और ठीक एक वर्ष बाद यह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल राजनेता नहीं थे, बल्कि युगदृष्टा, ओजस्वी वक्ता और राजनीति के हिमालय पुरुष थे

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं लेखक गांव के संरक्षक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक’ ने कहा कि उत्तराखण्ड के निर्माण में अटल जी का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने राज्य निर्माण से जुड़े हुए कई मसलों पर साहसिक निर्णय लिये। डॉ. निशंक ने कहा कि अटल जी का साहित्य जीवंत साहित्य है, जितनी बार पढ़ो उतनी ही बार नई ऊर्जा, नई चेतना और नई आशा का संचार करती है। लेखक गांव की उत्पति का श्रेय भी उन्होंने अटल जी को दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने एक बार कहा था कि निशंक, साहित्यिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों के सामने कई चुनौतियाँ हैं, एक स्थान ऐसा अवश्य होना चाहिए जो उनकी सृजन शक्ति को प्रोत्साहित करे। आज उनके संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा का प्रतिफल यह लेखक गांव है।
इस अवसर पर अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के अध्यक्ष सुरेश नीरव, उत्तरांचल उत्थान के संरक्षक प्रेम बुड़ाकोटी ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर नन्हें बाल कवियों ने अटल जी पर केन्द्रित कविताओं का पाठ किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा की पूर्व निदेशक डॉ. सविता मोहन, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गोविन्द सिंह रजवार, प्रति कुलपति डॉ. राकेश सुन्द्रियाल, क्वाड्रा आयुर्वेदिक कॉलेज के निदेशक डॉ. मनोज गोयल, किरोड़ीमल कॉलेज के आचार्य डॉ. वेद प्रकाश, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र तड़ियाल, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता नयाल, राज्यमंत्री डॉ. जयपाल चौहान, शोभाराम प्रजापति, थानो के ग्राम प्रधान सहित अनेक वरिष्ठ साहित्यकार एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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