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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सफल हुए सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया*
चारधाम यात्रा से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई, भ्रामक वीडियो पर FIR दर्ज*  *आस्था पर प्रहार नहीं सहेंगे: चारधाम यात्रा पर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा*
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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम*
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प्रधानमंत्री ने फिर व्यक्त की बाबा केदार में अटूट श्रद्धा* *सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए, केदारनाथ धाम के पिछले दौरों की तस्वीरें जारी की*
मुख्यमंत्री धामी ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान की गहन समीक्षा की*
मुख्यमंत्री धामी पहुंचे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा,*  *विकास कार्यों का लिया जायजा*  *शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडल*
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा के लिए प्रेषित की शुभकामनाएं* *डिजिटल उपवास पर रहते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें तीर्थयात्री*
श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ के कपाट विधि-विधान के साथ खुले*
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हूल दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का नमन: सिदो-कान्हू और वीर आदिवासियों को अर्पित की श्रद्धांजलि

हूल दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का नमन: सिदो-कान्हू और वीर आदिवासियों को अर्पित की श्रद्धांजलि

हूल दिवस: आदिवासी संघर्ष की अनकही कहानी

नई दिल्ली – हूल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संथाल विद्रोह के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे क्रांतिकारियों की बहादुरी और बलिदान औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ संघर्ष की अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “हूल दिवस हमें हमारे आदिवासी समाज के साहस और बलिदान की याद दिलाता है। मैं सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो समेत उन सभी वीर शहीदों को नमन करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी गाथाएं देश को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस ऐतिहासिक दिवस पर श्रद्धांजलि दी और कहा, “सिदो और कान्हू के नेतृत्व में लड़ा गया यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अन्याय के खिलाफ एकजुटता की मिसाल बना। हजारों आदिवासी भाइयों-बहनों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनका बलिदान सदा स्मरणीय रहेगा।”

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “हूल दिवस के अवसर पर संथाल विद्रोह के अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन करता हूं। ‘अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो’ का नारा बुलंद कर विद्रोह का बिगुल फूंकने वालों की गौरवगाथा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

हूल दिवस का इतिहास:

हर साल 30 जून को मनाया जाने वाला हूल दिवस 1855 में संथाल विद्रोह की स्मृति में मनाया जाता है। झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में सिदो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में शुरू हुए इस आदिवासी आंदोलन ने ब्रिटिश सत्ता, जमींदारों और महाजनों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम और साहसिक अध्याय माना जाता है।

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