Headline
उत्तराखंड में नकल माफियाओं पर एक और बड़ी कार्रवाई, यूटीयू परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार* *सीएम पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देश, नकल माफियाओं को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी*
मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश*  *मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं*
मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश* *मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनी समस्याएं*
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ*
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ*
मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘*
मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘*
आम महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “बीज संजीवनी अभियान” का किया शुभारंभ*
आम महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “बीज संजीवनी अभियान” का किया शुभारंभ*
विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम बढ़ी आगे* *जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विश्वविद्यालय का किया भ्रमण*
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में प्रदेश में ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी, देहरादून, डॉ आशीष चौहान ने दिए छुट्टी के आदेश, जानिए ये खबर
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी, देहरादून, डॉ आशीष चौहान ने दिए छुट्टी के आदेश, जानिए ये खबर
रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं* *धामी सरकार की पहल : सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन तलाशने की कवायद*

विश्व वन्यजीव दिवस पर विशेष रिपोर्ट

विश्व वन्यजीव दिवस पर विशेष रिपोर्ट

अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण छोड़ सकें

वन्यजीवों और प्रकृति से हमारा संबंध केवल जीविका का नहीं बल्कि जीवन का भी है

“स्वामी चिदानन्द सरस्वती”

ऋषिकेश। संयुक्त राष्ट्र विश्व वन्यजीव दिवस हमें प्रकृति, वन्यजीवों और पेड़ पौधों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने का एक अवसर प्रदान करता है। इस दिन का उद्देश्य न केवल वन्यजीवों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा देना है, बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाता है कि वन्यजीवों का संरक्षण हमारे जीवन के साथ साथ इस पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस वर्ष विश्व वन्यजीव दिवस का विषय है. वन्यजीव संरक्षण वित्त- लोगों और ग्रह में निवेश जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम वित्तीय संसाधनों के माध्यम से वन्यजीवों के संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि वन्यजीवों और प्रकृति से हमारा संबंध जीविका और जीवन दोनों हैं। यह केवल एक भौतिक या पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह हमारी आंतरिक शांति और संतुलन से जुड़ा हुआ है। जब हम वन्यजीवों की रक्षा करते हैं तो हम इस पृथ्वी पर जीवन के उस दिव्य रूप का सम्मान करते हैं जिसे सृष्टि के नियंता ने बनाया है। साथ ही उस नियंता का भी सम्मान करते हैं जिन्होंने हमें इसे सँभालने की जिम्मेदारी दी है।

स्वामी जी ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल हमारे बाहरी पर्यावरण की रक्षा करने के लिए नहीं हैए बल्कि यह हमारे अंदर की प्रकृति और मनुष्यत्व के प्रति जागरूकता का परिणाम है। यदि हम अपने भीतर के प्रकृति के साथ एकत्व स्थापित कर पाते हैंए तो हम बाहर की दुनिया को भी संरक्षित और सशक्त बना सकते हैं।

स्वामी चिदानंद जी ने यह भी कहा कि वन्यजीवों की रक्षा करने के साथ.साथ हमें मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझना होगा और यही हमारे आंतरिक और बाह्य जीवन के संतुलन को बनाए रखने का मार्ग है।

संयुक्त राष्ट्र का यह संदेश कि हमें वन्यजीव संरक्षण के लिए वित्तीय निवेश करने की आवश्यकता हैए एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू है। लेकिन यह केवल बाहरी निवेश का मुद्दा नहीं है। जब हम किसी कार्य में निवेश करते हैंए तो वह केवल भौतिक रूप से ही नहींए बल्कि मानसिक और आत्मिक रूप से भी निवेश होना चाहिए इसलिये वन्यजीव संरक्षण को न केवल एक भौतिक प्रयास के रूप में देखा जायेए बल्कि एक आध्यात्मिक कर्तव्य के रूप में भी देखना होगा।

स्वामी जी ने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सच्ची आध्यात्मिकता है। प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण हमारे धर्म का हिस्सा है। हमारे पूर्वजों ने हमें यह सिखाया कि पृथ्वीए जलए वायुए अग्नि और आकाश इन सभी तत्वों का संतुलन बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। जब हम इनका संरक्षण करते हैंए तो हम वास्तव में उन धार्मिक शिक्षाओं का पालन कर रहे होते हैंए जो हमें जीवन की सच्ची समझ देती हैं।

हमारे समाज की प्रगति और विकास तभी संभव है जब हम सामूहिक रूप से वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण में योगदान करें। यह हमारे जीवन का हिस्सा है। हमें सिर्फ प्रकृति का उपयोग नहीं करना है, बल्कि हमें उसे संरक्षित भी करना है।

स्वामी जी ने सभी को प्रेरित किया कि हम अपने दैनिक जीवन में इन संवेदनशील जीवों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करें ताकि अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण छोड़ सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top