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*हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री*  *मुख्यमंत्री की घोषणा-हर वर्ष प्रदान किया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’*
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उत्तराखंड में आज से शुरू होने जा रही मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना*  *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज करेंगे मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना का शुभारंभ*
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देखी आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश’, नीम करौली बाबा की भक्ति और सेवा भावना से हुए अभिभूत*
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पशुपालन तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के 101 नवनियुक्त कार्मिकों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किए नियुक्ति पत्र*
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*26 मदरसों को मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र*  “ *आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल”*
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मुख्यमंत्री ने चम्पावत में किया ‘खेल महाकुम्भ-मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी-2026’ का शुभारम्भ*
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प्रयागराज कुंभमेला में श्रीराममय हुआ परमार्थ निकेतन शिविर

प्रयागराज कुंभमेला में श्रीराममय हुआ परमार्थ निकेतन शिविर

प्रभु श्री राम सनातन के सूर्य

सब समान, सब का सम्मान यही हैं सनातन का संविधान

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

प्रयागराज। परमार्थ निकेतन शिविर महाकुम्भ की धरती पर आज अद्भुत, अलौकिक और ऐतिहासिक क्षण है, पूरा शिविर वेदमंत्रों से गूंज रहा है। आज इस शुभ अवसर पर श्रीराम जी की दिव्य प्रतिमा की विधिवत स्थापना हुई जो कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का आदर्श प्रतीक है। यह विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के अद्वितीय मूल्यों के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

प्रभु श्रीराम का जीवन और उनके आदर्श, भारतीय संस्कृति के उच्चतम सोपान है। श्रीराम जी का व्यक्तित्व धर्म, न्याय, और मर्यादा का प्रतीक है। प्रभु श्रीराम की दिव्य, भव्य और अलौकिक प्रतिमा की विधिवत स्थापना भारतीय मूल्यों की स्थापना का प्रतीक है, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार पूरे वातावरण हो रहा है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि प्रयागराज की पुण्यभूमि में प्रभु श्री राम जी की प्रतिमा की स्थापना केवल व्यक्तिगत उद्धार का माध्यम नहीं है, बल्कि समग्र समाज और राष्ट्र के निर्माण का स्रोत है। श्रीराम जी का जीवन सनातन धर्म का आदर्श है जो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सत्य, धर्म और न्याय का मार्गदर्शन करने वाले सूर्य के समान हैं।

स्वामी जी ने कहा कि कुम्भ महापर्व का सबसे बड़़ा संदेश है एकता और समरसता। परमार्थ निकेतन शिविर, सभी को जोड़ने और सभी से जुड़ने को प्राथमिकता देता है। चाहे वह कोई भी जाति, धर्म, रंग या स्थान से हो, यहाँ प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत व अभिनन्दन है। यह शिविर हर व्यक्ति को यह महसूस कराता है कि हम सब एक ही ब्रह्म के अंश हैं और हमारे बीच कोई भेदभाव नहीं है। यहां पर सब समान, सब का सम्मान चाहे शबरी हो या निषादराज यहां सब का सम्मान है।

स्वामी जी ने कहा कि सनातन धर्म का मूल सिद्धांत ‘सब समान, सब का सम्मान’ पर आधारित है, जो न केवल भारतीय संस्कृति की नींव है, बल्कि समग्र मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है और यही सनातन का संविधान भी है, जो हमें जीवन के हर क्षेत्र में एकता, प्रेम, और भाईचारे की भावना से जीने की प्रेरणा देता है।

यह सनातन संविधान हमें सिखाता है कि धर्म, जाति, या किसी अन्य भेद के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। हम सभी को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त है, और यही हमारी सांस्कृतिक विरासत है।

परमार्थ निकेतन शिविर का हर कोना मंगलभवन अमंगलहारी दिव्य अलौकिक ध्वनि के साथ गूंज उठा। इटली से आये माहि गुरूजी और विदेशियों के दल ने शिवस्तोत्र व कई भजन गाये। पूज्य स्वामी जी ने श्रीराम के अतुलनीय गुणों और उनकी विजय की महिमा का गुणानुवाद किया जिसे श्रवण कर सभी भक्तगण प्रभु श्रीराम की उपासना में मग्न हो गये और दिव्यता का अनुभव किया। यहां शांति और आशीर्वाद से परिपूर्ण अद्भुत वातावरण हैं।

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