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मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ*
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मुख्यमंत्री ने किया ‘सेवा विधि‘ पुस्तक का विमोचन‘‘*
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आम महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “बीज संजीवनी अभियान” का किया शुभारंभ*
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छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी, देहरादून, डॉ आशीष चौहान ने दिए छुट्टी के आदेश, जानिए ये खबर
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प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर आए ऋषिकेश। बम लहरी पर झूमा परमार्थ गंगा तट

प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर आए ऋषिकेश। बम लहरी पर झूमा परमार्थ गंगा तट

डा. वेदप्रकाश जी द्वारा रचित ’विकसित भारत का संकल्प’ पुस्तक का परमार्थ निकेतन गंगा तट पर लोकार्पण

ऋषिकेश। भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गायक, कैलाश खेर का परमार्थ निकेतन पहुंचने पर ऋषिकुमारों ने शंख ध्वनि व वेदमंत्रों से उनका स्वागत एवं अभिनन्दन किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में कैलाश खेर ने विश्व प्रसिद्ध गंगा जी की आरती में सहभाग कर अपनी श्रद्धा और भक्ति अर्पित की। कैलाश खेर ने गंगा जी की महिमा में आदियोगी, आदिअनंता, बम लहरी गीत गाकर यहां के दिव्य वातावरण को और भी अलौकिक बना दिया। उन्होंने अपने संगीतमयी सुरों से आदियोगी, आदिअनंता, और बम लहरी जैसे दिव्य गीतों को गाकर पूरे वातावरण में एक अद्भुत दिव्यता और उल्लास का संचार कर दिया। उनके गीतों की आध्यात्मिक मस्ती के अंदाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति की गहराई में डुबो दिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक धारा में संगीत और आध्यात्मिकता का गहरा संबंध है। आध्यात्मिक संगीत, विशेष रूप से संगीत, न केवल हमारे दिलों में आनंद का संचार करने के साथ ही आत्मा को शांति और दिव्यता भी प्रदान करता है।

कैलाश खेर का संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना का रूप है। उनका संगीत सदैव हमारे दिलों को शांति और प्रेम का अहसास कराता है। आदियोगी और आदिअनंता जैसे गीतों के माध्यम से कैलाश खेर ने न केवल भगवान शिव की महिमा का गायन किया, बल्कि इन गीतों के माध्यम से उन्होंने समग्र ब्रह्मांड की दिव्यता और अनंतता की अवधारणा को भी प्रस्तुत किया।

कैलाश खेर के संगीत में जो आध्यात्मिकत और प्रेम की भावना है, वह गंगा जी की आरती के दौरान और भी स्पष्ट हो जाती है। जब भी गंगा तट पर उनकी आवाज गूंजती है, एक विशेष आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराती है। प्रभु से जुड़ें संगीत व प्रभु भाव में डूब कर गाये गये संगीत का आत्मिक कनेक्शन और आध्यात्मिक कनेक्शन अद्भुत है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि गंगाजी का जल केवल हमारी शारीरिक प्यास को ही नहीं बुझाता, बल्कि यह हमारी आत्मा को भी शांति और संतुलन प्रदान करता है।

कैलाश खेर ने परमार्थ निकेतन के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि परमार्थ निकेेतन गंगा तट की आध्यात्मिकता का एक अपूर्व अनुभव है। यहां की शांति और दिव्यता शब्दों से परे है। मैं आभारी हूं कि मुझे परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आकर इस पवित्र स्थान पर गाने का अवसर पूज्य स्वामी जी की कृपा से मिलते ही रहता है।

स्वामी जी ने विकसित भारत का संकल्प के लेखक डॉ. वेदप्रकाश जी को उनकी पुस्तक के लिये शुभकामनायें देते हुये कहा कि विकसित भारत का संकल्प केवल एक व्यक्ति या सरकार का नहीं है, यह पूरे राष्ट्र का संकल्प है। यह तभी पूरा होगा जब हर भारतीय अपने कर्तव्यों को समझे और समाज, राष्ट्र और प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को निभाए। हम सब मिलकर भारत को उस ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं, जहां यह एक विकसित और सशक्त राष्ट्र बनकर पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

विकसित भारत का संकल्प हम सबका संकल्प है, और इसे पूरा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत एक प्राचीन और समृद्ध इतिहास वाला देश है, जिसने समय-समय पर अपनी अद्वितीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों के बल पर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है लेकिन 21वीं सदी का भारत केवल अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रह सकता। आज का भारत विकास के नए आयामों को छूने का सपना देख रहा है। विकसित भारत का संकल्प हर भारतीय का स्वप्न है। इसी विषय को ध्यान में रखते हुये डॉ. वेदप्रकाश जी की पुस्तक ’विकसित भारत का संकल्प’ वर्तमान भारत की गौरवमयी गाथा को पाठकों तक पहुंचायेगी।

स्वामी जी ने कैलाश खेर और डॉ. वेदप्रकाश को हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का पौधा आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया।

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